प्रकाश संश्लेषण (photosynthesis) : प्रकाश संश्लेषण तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि-:

प्रकाश संश्लेषण:

सभी हरे पौधे तथा कुछ सूक्ष्म प्राणियों में ही यह क्षमता होती है कि वे सूर्य द्वारा नि:सृत तथा पृथ्वी पर प्राप्त प्रकाशीय ऊर्जा की मात्र 4 % ऊर्जा को ग्रहण करके भोजन हेतु प्रयोग में ला सकते हैं। पौधों द्वारा प्रकाशीय ऊर्जा रासायनिक उर्जा में बदल ली जाती है जो भोजन के रूप में संगृहीत होते हैं। यह कार्य पर्णहरित
 की उपस्थिति में प्रकाश - संश्लेषण के द्वारा होता है।



प्रकाश संश्लेषण की परिभाषा:

प्रकाश संश्लेषण, अपचायक क्रिया हैजिसके द्वारा अकार्बनिक सरल योगिको,जल  तथा कार्बन डाइऑक्साइड को प्रकाशीय  ऊर्जा के द्वारा कार्बोहाइड्रेटस के रूप में बदल दिया जाता है। प्रकाशीय ऊर्जा का उपयोग पर्णहरित की उपस्थिति में किया जाता है तथा इसमें ऑक्सीजन उप-उत्पाद के रूप में निकलती है।




प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि-:

प्रकाश संश्लेषण दो भागों में घटित होती है।
(क) प्रकाशीय अभिक्रियाऍ
(ख) अप्रकाशीय अभिक्रियाऍ

(क) प्रकाशीय अभिक्रियाऍ-:

इन अभिक्रिया में प्रकाश संश्लेषण के लिए सभी पदार्थ सम्मिलित है जिनके लिए प्रकाश अनिवार्य है यह प्रक्रियाऍ हरितलवक के ग्रैना नामक भागों में होती है।
(i) सूर्य के प्रकाश की विकिरण ऊर्जा के करण क्लोरोफिल के अणु सक्रिय हो जाते हैं और उत्तेजित इलेक्ट्रॉन्स का निष्कासन करते हैं।



(ii) सक्रिय क्लोरोफिल की उपस्थिति में आवश्यक ऊर्जा प्राप्त कर जल केअणुओ विच्छेदन होता है जिससे हाइड्रोजन कथा ऑक्सीजन प्राप्त होती है।
(iii) उत्तेजित इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण तंत्र के द्वारा अपनी ऊर्जा मुक्त करता है मुक्त ऊर्जा को ADP के अणुओं में एक फॉस्फेट गुट और जोड़कर (ATP अणु  बनाकर) संचित कर लिया जाता है।
(iv) मुक्त हाइड्रोजन NADP नामक हाइड्रोजन ग्राही
के द्वारा ग्रहण कर ली जाती है। इसमें NADP.H2 का निर्माण होता है।



(ख) अप्रकाशीय अभिक्रियाऍ-:
इन क्रियाओं के लिए प्रकाश की आवश्यकता नहीं  है। इन अभिक्रियाऔ को इनकी खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम के आधार पर ब्लैकमैन अभिक्रियाएं भी कहते हैं।ये क्रियाएं हरितलवक की पीठिका या स्टृोमा होता है। इन समस्त क्रियाओं को जो एक‌ विशेष पदार्थ रिबुलोस
बाइफॉस्फेट उपस्थिति में चक्र के रूप में होता है, केल्विन चक्र कहते हैं।
(i) कुछ विशेष पदार्थों की उपस्थिति में वातावरण से प्राप्त CO2 का प्रकाशीय क्रिया से प्राप्त NADP.H2 के H+से अवकरण होता है और PGAL नामक पदार्थ बनता है। इन क्रियाओं में निम्नलिखित अभिक्रिया सम्मिलित हैं।
(क) 5 कार्बन वाले योगिक RuBP(रिबुलोस बायफाॅस्फेट) के साथ कार्बन डाइऑक्साइड अणु (6CO2) मिलकर एक 6 कार्बन अस्थाई योगिक का निर्माण करते हैं।



(ख) PGAL के दो अणु मिलकर अब चयन के द्वारा फाॅस्फोरस शर्करा का तथा बाद में शर्करा का निर्माण करते हैं।
(ख) केल्विन चक्र में PGAL तथा इसके उत्पादों से रिवुलोस बायफास्फेट (RuBP) का फिर से निर्माण हो जाता है अर्थात यह चक्र की अभिक्रिया को चलाने के लिए फिर से तैयार हो जाता है।






प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक पदार्थ-:

(i) सूर्य का प्रकाश
( ii) कार्बन डाई ऑक्साइड
(iii) जल
(iv) क्लोरोफिल



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